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Rashtrapati ki Shaktiyan राष्ट्रपति की शक्तियां

Rashtrapati ki Shaktiyan राष्ट्रपति की शक्तियां

राष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य

राष्ट्रपति की बहुत शक्तिया होती है जिनमे से कुछ महत्वपूर्ण शक्तिया इस प्रकार है

कार्यकारी शक्तिया
विधायी शक्तिया
वित्तीय शक्तिया
न्यायिक शक्तिया
आपातकालीन शक्तिया
सैन्य शक्तिया

राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तिया 

देश का शासन राष्ट्रपति के नाम से चलाया जाता है

राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होता है

प्रधानमंत्री की सहायता से मंत्रिपरिषद की नियुक्तियां करता है

Attorney General और CAG संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्तियां करता है

वित्त आयोग की नियुक्तियां करता है

अन्तर्राजीय परिषद् की नियुक्ति करता है

अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र के प्रशासन सम्बंधित शक्तिया

केंद्र शासित प्रदेशो में उपराज्य्पाल और प्रशासकों की नियुक्ति करता है

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति करता है

राज्य में राज्य्पाल की नियुक्ति करता है

राष्ट्रपति की विधायी शक्तिया

हर वर्ष की शुरुवात में संसद के सत्र की शुरुआत, राष्ट्रपति के भाषण के जरिये होती है यानि के संसद के सत्र को राष्ट्रपति बुलाता है

लोकसभा के गठन होने पर भी राष्ट्रपति के भाषण से ही सत्र की शुरुआत होती है

संसद बंद करने की घोषणा भी राष्ट्रपति करता है

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है

संयुक्त अधिवेशन को भी राष्ट्रपति ही बुलाता है

संयुक्त अधिवेशन – इसकी अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है और ये भारतीय संविधान के Article 108 के तहत आता है

राष्ट्रपति लोकसभा में 2 Anglo Indian की नियुक्ति भी करता है

राज्यसभा में 12 व्यक्तियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करता है जिन्होंने कला, साहित्य , विज्ञानं, सेवा आदि के क्षेत्र में अच्छा काम किया हो

बिल पास करता है और कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर चाहिए होते है क्योकि किसी भी बिल को कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर चाहिए होते है

धन विधयेक और राज्य के नाम में परिवर्तन , राज्य की सीमा में परिवर्तन , ये सभी विधेयक भी राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से संसद में पेश किये जाते है

राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार होता है जब संसद में सत्र न चल रहा हो तो ( ये Article 123 के तहत आता है)

वित्तीय शक्तिया 

धन विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति से ही पेश किया जाता है

आकस्मिक विधि से धन निकलने के लिए अनुमति राष्ट्रपति देता है

सैन्य शक्तिया

तीनो सेनाओ का सेनापति होता है राष्ट्रपति

थल सेना , वायु सेना , जल सेना इस सभी सेनाओ के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है

युद्ध शुरू करने और युद्ध को ख़त्म करने की अनुमति राष्ट्रपति देता है

न्यायिक शक्तिया

राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायधिशो की नियुक्ति करता है

उच्चतम न्यायालय से क़ानूनी सलाह मांग सकता है लेकिन सलाह मैंने के राष्ट्रपति बाध्य नहीं है (ये article 143 के तहत आता है)

क्षमा दान से सम्बंधित शक्तिया – ये article 72 के तहत आती है

राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बंधित किसी भी विवाद को सुलझाने का काम उच्च न्यायालय करता है

आपातकालीन शक्तिया

इसमें तीन तरह के आपातकाल शामिल है

राष्ट्रीय आपातकाल – article 372 के तहत आती है

राज्यों में राष्ट्रपति शासन – आर्टिकल 356 के तहत आती है

वित्तीय आपातकाल – article 360 के तहत आती है

राष्ट्रीय आपातकाल – युद्ध , बाहरी आक्रमण इसमें शामिल है

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की लिखित सिफारिश पर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाता है (एक महीने तक)

इससे ज्यादा आपातकाल लगाना हो तो संसद में 2 /3 बहुमत से पास करवाना होता है (6 महीने तक लग सकता है)

अब तक तीन बार राष्ट्रपति शासन लागु हुआ है

पहली बार – 1962 में भारत और चीन के युद्ध के समय

दूसरी बार – 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय

तीसरी बार – 1975 में इंदिरा गाँधी के समय में

ऐसे समय में मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए जाते है (article २० और आर्टिकल 21 को छोड़कर)

राज्यों में राष्ट्रपति शासन – (article 356 के तहत आता है)

जब राज्य में सवैधानिक तंत्र फेल हो जाये तो राज्यपाल की सिफारिश पर लगाया जाता है और प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की लिखित सिफारिश पर दो महीने तक लगाया जा सकता है इससे ज्यादा चाहिए हो तो संसद के द्वारा बहुमत से पारित करना होता है

वित्तीय आपातकाल 

जब दीवालापन आ जाये तब –

यदि राष्ट्रपति इस्तीफा दे दे या उसकी मृत्यु हो जाये तो उपराष्ट्रपति , कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा

उपराष्ट्रपति केवल 6 महीने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है इसलिए चुनाव करना अनिवार्य है

उपराष्ट्रपति – article 63 के तहत आता है

article 63 में कहा गया है की भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा

उपराष्ट्रपति की योग्यताएँ

भारत का नागरिक हो

उसकी उम्र 35 हो

राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो

20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक होने चाहिए

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल

राज्यसभा और लोकसभा के सभी मनोनीत और निर्वाचित सदस्य भाग लेंगे

एकल संक्रमणीय आनुपातिक प्रणाली के आधार पर

शपथ – उपराष्ट्रपति को शपथ राष्ट्रपति दिलवाता है

उपराष्ट्रपति त्याग पत्र भी राष्ट्रपति को देगा

उपराष्ट्रपति के कार्य

राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है

राष्ट्रपति का पद खाली होने पर 6 महीने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है

राष्ट्रपति की विट्टो शक्तिया – article 111 के तहत आती है

अत्यंतिक वीटो
विशेषित वीटो
निलम्बनकरी
पॉकेट वीटो

उपराष्ट्रपति को पद से हटाना 

प्रस्ताव राज्यसभा में रखेगा और 2 /3 बहुमत से पास हो और उसके बाद लोकसभा की मंजूरी मिल गयी हो

Updated: October 30, 2019 — 2:13 pm

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