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Rajyapal of India – राज्यपाल

Rajyapal of India – राज्यपाल

 

Article 153 कहता है की राज्यों में राज्यपाल होंगे भारत में
Article 154 में राज्यपाल की शकितयों का वर्णन है
Article 155 के तहत भारत में राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है
राज्यपाल का पद कनाडा से लिया गया है। राज्यपाल मंत्रिपरिषद की मदद से अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है
भारतीय संविधान के 7 वे संशोधन में कहा गया है की 2 राज्यों का राज्यपाल एक ही हो सकता है
राज्य का प्रमुख – राज्यपाल होता है
देश का प्रमुख – राष्ट्रपति होता है
राज्यपाल के लिए क्या क्या योग्यता होनी चाहिए ये Article 157 और Article में बताया गया है

राज्यपाल के लिए योग्यताएँ

वह भारत का नागरिक हो
उसकी आयु 35 वर्ष हो
वह किसी लाभ के पद पर न हो
शपथ – सम्बंधित राज्य के उच्च न्यायलय का मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलवाता है
कार्यकाल – 5 वर्ष का होता है
राज्यपाल को राष्ट्रपति हटा सकता है 5 वर्ष से पहले और राज्यपाल का तबादला भी किया जा सकता है और राज्यपाल एक से अधिक बार नियुक्त हो सकता है राज्य में
पहली महिला राज्यपाल – सरोजनी नायडू (उत्तरप्रदेश)

राज्यपाल की शक्तिया

राज्य का प्रमुख होता है
मुख्यमंत्री की मदद से मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है
राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति करता है
राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करता है लेकिन इनको हटाने का अधिकार राष्ट्रपति का होता है
महाधिवक्ता (राज्य सरकार का वकील) की नियुक्ति करता है
महान्यायवादी – ये केंद्र सरकार का वकील होता है

राज्यपाल की विधायी शक्तिया

हर वर्ष विधान मंडल की बैठक की शुरुआत राज्यपाल के भाषण से होती है
नयी विधान सभा के गठन पर पहली बैठक की शुरुआत राज्यपाल के भाषण से होती है
राज्यपाल विधान मंडल के सत्र को बुलाता है और सत्र को स्थगित करने का अधिकार भी राज्यपाल के पास होता है
विधान सभा में 1 एंग्लो इंडियन को मनोनीत कर सकता है
राज्य में कोई भी विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर करने के बाद ही कानून बनता है

राज्यपाल की वित्तीय शक्तिया

धन विधेयक केवल राज्यपाल की अनुमति से ही पेश किया जा सकता है
विधान परिषद् में कुल सदस्यों के 1 /6 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है
राज्यपाल वित्त आयोग की नियुक्ति करता है
राज्यपाल , CAG और राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट को विधान मंडल में पेश करता है
जब विधान मंडल का सत्र न चल रहा तब अध्यादेश जारी करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है
इसकी Validity 6 महीने तक होती है और 6 हफ्ते की बढ़ाई जा सकती है

Article 161 – राज्यपाल की क्षमादान शक्तिया

यह सजा को काम कर सकता है
मृत्युदंड को कुछ समय के लिए स्थगित कर सकता है लेकिन माफ़ नहीं कर सकता
सैन्य न्यायलय द्वारा सजा प्राप्त व्यक्ति की सजा कम नहीं कर सकता
Article 356 के तहत राज्य में जब सवैधानिक तंत्र फेल हो जाये तो राज्यपाल , राज्य में राष्ट्रपति शाशन की सिफारिश कर सकता है
जम्मू कश्मीर में राज्यपाल और राष्ट्रपति शाशन चलाया जा सकता है
राज्यपाल राज्य के विश्वविधालयो का चांसलर होता है
राज्यपाल राज्य के विशवविधालय के Vice Chancler की नियुक्ति करता है

दिल्ली यूनिवर्सिटी का चांसलर – उपराष्ट्रपति होता है

Article 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमंत्री की सहायता से मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त करता है यदि किसी भी दल का मुख्यमंत्री न हो तो राज्यपाल सबसे बड़े दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करेगा

मुख्यमंत्री की योग्यताएं

वह भारत का नागरिक हो
उसकी आयु 35 वर्ष से कम हो
दिवालिया न हो
मुख्यमंत्री और उसकी मंत्रिपरिषद को शपथ राज्यपाल दिलवाता है
मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री बनने के लिए विधान सभा का सदस्य होना चाहिए और यदि सदस्य नहीं है तो 6 महीने के अंदर सदस्य्ता ग्रहण कर लेनी चाहिए

कार्यकाल – 5 वर्ष का होना चाहिए

लेकिन विधान सभा में बहुमत गिर जाये तो राज्यपाल को अपना पद छोड़ना पड़ेगा

मुख्यमंत्री राज्यपाल को कहकर विधान सभा को भंग कर सकता है

मंत्रिपरिषद

भारतीय संविधान के 91 वे संशोधन में कहा गया है की विधान सभा के 15 % सदस्य ही इसके सदस्य होने चाहिए और मंत्रिपरिषद का आकार कम से कम 12 मंत्री होने चाहिए

मंत्रिपरिषद का कार्यकाल – 5 वर्ष

विधानसभा भंग होने पर मंत्रिपरिषद बर्खाश्त हो सकती है

मुख्यमंत्री राज्यपाल को कहकर किसी भी मंत्री को अपने पद से हटवा सकता है

संसदीय सचिव – मंत्री के समान सेवाएं प्राप्त होती है

विधान मंडल में शामिल – विधान परिषद् , विधान सभा , राज्यपाल

Article 169 में संसद को किसी भी राज्य में विधान परिषद् गठित करने और समाप्त करने का अधिकार प्राप्त है लेकिन वह प्रस्ताव सम्बंधित राज्य की विधान सभा द्वारा 2 /3 बहुमत से पारित होना जरुरी है

विधान परिषद्

Article 171 – विधान परिषद् का आकार , विधान सभा के 1 /3 हिस्से से अधिक नहीं होना चाहिए इसके कम से कम 40 सदस्य होने चाहिए
लेकिन इसका अपवाद ये है की जम्मू की विधान परिषद् में 36 सदस्य है भारत के सात राज्यों में विधान परिषद् है जम्मू , उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र , कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना

विधान परिषद् के सदस्यों की योग्यताएँ

भारत का नागरिक हो

उसकी उम्र 30 वर्ष हो

अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन होता है
1 /6 सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनीत होते है
1 /3 सदस्य विधान सभा द्वारा निर्वाचित होते है
1 /3 सदस्य , नगरपालिका , जिला बोर्ड़, स्थानीय शासन संस्था के द्वारा निर्वाचित होते है
1 / 12 सदस्य स्नातकों द्वारा निर्वाचित होते है
1 / 12 सदस्य शैक्षणिक संस्थानों के सदस्यों द्वारा निर्वाचित होते है

विधान सभा द्वारा पारित किसी विधेयक को विधान परिषद् 4 महीने तक रोक लगा सकती है इसके बाद वह खुद ही पारित हो जाता है

विधान सभा

ये Article 170 के तहत आता है
विधान सभा की अधिकतम सीट 500 होती है और न्यूनतम 60 होती है
लेकिन इसका अपवाद ये है के गोवा में 40 है और पॉन्डिचेरी में 30 है
सबसे अधिक सीट 403 उत्तरप्रदेश में है

विधान सभा के सदस्यों की योग्यताएँ

आयु – 35 वर्ष होनी चाहिए
शपथ – स्पीकर दिलवाता है और चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है
इसका कार्यकाल – 5 साल का होता है

विधान सभा की शक्तिया

विधान सभा में बजट को पेश करना
धन विधेयक भी यही पेश किया जाता है

Updated: November 1, 2019 — 7:38 pm

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