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गाँधी युग हिंदी में – Gandhi Yug in Hindi

गाँधी युग हिंदी में- Gandhi Yug

Gandhi Yug in Hindi

1869 – 1948 स्वंतंत्रता का तीसरा चरण

गाँधी जी का जन्म – 2 October 1869
जगह – पोरबंदर
गांव – कठियावाड़

गाँधी जी के दादा का नाम – उत्तम चंद्र गाँधी

पिताजी का नाम – करमचंद गाँधी

माता का नाम – पुतली बाई

गाँधी जी के बेटे – मणिकलाल, हीरालाल, हरिदास , देवदास

गाँधी जी की आध्यात्मिक पत्नी का नाम – सरला चौधरी

गाँधी जी की आध्यात्मिक पत्नी के बेटे का नाम – जमनालाल बजाज (दत्तक पुत्र) कहा जाता है इन्हे

गाँधी जी के साउथ अफ्रीका में कार्य –

साउथ अफ्रीका में नसलभेद की निति चली हुई थी

साउथ अफ्रीका में भारतीय मूल के व्यापारी दादा अब्दुल्ला रहा करते थे उनका मुकदमा लड़ने के लिए गाँधी जी साउथ अफ्रीका गए थे

जब गाँधी जी साउथ अफ्रीका ट्रैन से जा रहे थे तो गाँधी जी को जोहान्सबर्ग के पास पटरियों पर लेटाकर मारा गया फिर इनकी मदद के लिए
गोपाल कृष्ण गोखले जाते है

1902 में गाँधी जी के द्वारा जोहान्सबर्ग में टोलस्ट्रॉय भवन का निर्माण किया गया

1904 में Durban में फीनिक्स भवन का निर्माण किया गया

गाँधी जी ने साउथ अफ्रीका में ही एक समाचार पत्र निकला जिसका नाम था इंडियन ओपिनियन

गाँधी जी का पहला व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू हुआ था साउथ अफ्रीका में ही

गाँधी जी 9 जनवरी 1915 को साउथ अफ्रीका से लौटते है और इसी कारण भारत सरकार के द्वारा 9 जनवरी 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है

इस दिवस को मनाने के लिए लक्ष्मी जी सिंघवी कमेटी ने सिफारिश की थी

2019 का प्रवासी भारतीय दिवस वाराणसी में मनाया गया

पहला प्रवासी भारतीय दिवस दिल्ली में 9 जनवरी में 2003 में मनाया गया

जब गाँधी जी साउथ अफ्रीका से लौटते है तो उस समय प्रथम विश्व युद्ध चला हुआ था उन्होंने इस युद्ध में अंग्रेजो का साथ दिया था और भारतीयों को इस युद्ध में भाग लेने के प्रेरित किया इसी कारण लोगो ने गाँधी को भर्ती करने वाला दलाल कहा था

गाँधी जी के द्वारा निकले गए समाचार पत्र –

यंग इंडिया – 1919 में (इंग्लिश में)
नवजीवन – 1919 में (गुजरती में)
हरिजन – 1933 (हिंदी में)
हिन्द स्वराज – 1909 में
गांधी की आत्मकथा – My Experiment With Truth (गुजरती में)
गाँधी जी के सचिव (assistant) – महादेव देसाई और प्यारे लाल

लखनऊ अधिवेशन – 1916

ये वही अधिवेशन है जिसमे गाँधी को राजकुमार शुक्ला नामक किसान मिला

इस अधिवेशन की अध्यक्ष अम्बिका चरण मजूमदार थी

इसी अधिवेशन में ही कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग के बीच में समझौता हुआ

चम्पारण सत्याग्रह – 1917

यह भारत में गाँधी जी का पहला सत्याग्रह था और यह सत्याग्रह अंग्रेजो की निल की खेती की तीन कठिया पद्धति के खिलाफ था
3 /20 भाग को तीन कठिया कहा जाता था

गाँधी जी ने लोगो को इस पद्धति से मुक्त करा दिया

गाँधी को चम्पारण में ही रविन्द्र नाथ टैगोर के द्वारा महात्मा की उपाधि दी गयी

किसानो को फसल ख़राब हो गयी थी लेकिन फिर भी अंग्रेज किसानो से टैक्स मांग रहे थे गाँधी ने इन किसानो को भी टैक्स से मुक्त करा दिया था

मिल – मजदुर आंदोलन 

1918 में गुजरात में प्लेग फ़ैल गया था (चूहों के काटने से फैलता है)

मिल मजदुर 50% प्लेग बोनस की मांग कर रहे थे और गाँधी जी भी इस आंदोलन में शामिल थे

अम्बालाल साराभाई के द्वारा इन मिल मजदूरों को 20% बोनस देने की बात कही गयी ऐसी बात सुनकर गाँधी जी भूख हड़ताल पर बैठ गए और 35% बोनस गाँधी जी ने दिलवाया

उस समय प्लेग कमिश्नर थे – रैंड (Rand) और अरमसत (aramst)

इन दोनों कमिश्नर को चापेकर बंधू ने गोली मार दी

उन चापेकर बंधुओ के नाम थे – दामोदर चापेकर , वासुदेव चापेकर , बाल कृष्ण चापेकर

रोलट एक्ट – 1919 में

इस एक्ट को सर सिडनी रोलट ने पारित किया इसको पारित करने का प्रमुख कारण था भारत में क्रन्तिकारी गतिविधियों को दबाना

इस एक्ट के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना किसी शक के आधार पर गिरफ्तार कर लिया जाता था

इस एक्ट को अंधा कानून और काला कानून कहा गया

इसका दिल्ली ने विरोध हुआ स्वामी श्रद्धानन्द ने इसका विरोध किया

पंजाब में भी इसका विरोध हुआ – सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल सेन ने इसका विरोध किया

इस एक्ट के तहत इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया (सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल सेन)

इसके विरोध में भारतीय लोग 13 अप्रैल 1919 में जलियावाला बाग में एकत्रित हुए उस समय भारत के वायसराय लार्ड चेम्सफोर्ड थे

जलियावाला बाग हत्याकांड – 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था जलियावाला बाग में

यह हत्याकांड करने वाला माइकल-ओ-डायर था

इसकी हत्या 1940 में उधम सिंह ने कर दी

हंटर आयोग – इसका अध्यक्ष सर हंटर था

इस आयोग ने जनरल डायर को निर्दोष घोषित किया था

मरने वाले लोगो की संख्या – 379
घायल व्यक्तियों की संख्या – 1200

तहकीकात कमेटी – इसके अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय थे

मरने वाले लोगो की संख्या – 1000
घायल व्यक्तियों की संख्या – 3000

असहयोग आंदोलन – 1920

यह आंदोलन 11 अगस्त 1920 को हुआ

यह आंदोलन गाँधी जी का भारत में पहला जन आंदोलन था

इस आंदोलन ने गाँधी को भारत का सच्चा सिपाही बना दिया था

यह आंदोलन बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु के साथ शुरू हुआ था

इस आंदोलन में गाँधी ने स्वराज खंड की स्थापना की और चरखे बाटे गए

असहयोग आंदोलन का प्रतिक चिन्ह खादी और चरखा था

असहयोग आंदोलन की घोषणा नागपुर अधिवेशन में हुई थी वीर राजवाचार्य की अध्यक्ष्ता में हुई और कोलकाता अधिवेशन में कहा गया की अब चला दो इस आंदोलन को उस समय कोलकाता अधिवेशन के अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे

असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने वाला पहला व्यक्ति – मोहम्मद अली

असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने वाली पहली महिला – बासन्ती देवी (यह चितरंजन दास की पत्नी थी)

चोरा – चोरी कांड – 1922

यह कांड 5 फरवरी 1922 को उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ था

एक स्थानीय जुलुस ने 22 अंग्रेजो को थाने में बंद करके आग लगा दी थी

गाँधी जी इस घटना से दुखी थे और 12 फरवरी को असहयोग आंदोलन वापिस ले लिया

गाँधी का विरोध करने वाले नेता

चितरंजन दास
सुभाष चंद्र बोस
जवाहर लाल नेहरू

स्वराज पार्टी
संस्थापक – चितरंजन दास

सचिव – मोतीलाल नेहरू

इसको गठन करने का कारण – यह पार्टी विधान परिषद् में होने वाले चुनाव में भाग लेना चाहती थी इसी पार्टी के द्वारा पहला केंद्रीय मंत्री
विधान परिषद् में 1925 में विट्ठल भाई पटेल भेजे गए

स्वराज पार्टी का अंत चितरंजन दास की मृत्यु के बाद हो गया

क्रन्तिकारी आंदोलन

HRA – Hindustan Republican Association

1924 में कानपूर में इस एसोसिएशन की स्थापना हुई

संस्थापक – राम प्रसाद बिस्मिल , चन्द्र शेखर आजाद (मुख्य)

इन सदस्यों ने 1925 में काकोरी कांड किया (बिहार ने पड़ता है काकोरी)

और इनके द्वारा ही चलती ट्रैन में दास हजार रुपए और कुछ हथियार लुटे गए

राम प्रसाद बिस्मिल ने नारा दिया था – सर फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

अशफ़ाक़ उल्ला ने नारा दिया था – धरती माँ का कर्ज चुकाना है

नौजवान सभा – 1926 में भगत सिंह ने शुरू की पंजाब में

बटलर आयोग – 1927 में
इसको बनाने का प्रमुख कारण था देसी रियाशत और अंग्रेज सरकार के बीच में संतुलन बनाना

साइमन कमीशन – 1927 में

भारत में यह 1928 में आया

1919 के अधिनियम के तहत प्रत्येक 10 वर्ष के विकास की समीक्षा करने एक आयोग आएगा यह white कमीशन के नाम से भी जाना जाता है

इसका विरोध हुआ – लखनऊ में , मुंबई में , मद्रास में , लाहौर में

सबसे पहले यह मुंबई में आया था

लखनऊ में जिसने विरोध किया – खलीकुज्जमा

मुंबई में जिसने विरोध किया – गाँधी

मद्रास में जिसने विरोध किया – T प्रकाशम्

लाहौर में जिसने विरोध किया – लाला लाजपत राय

लाला लाजपत राय और साण्डर्स के द्वारा लाठिया बरसाई गयी ये लाठिया 30 अक्टूबर 1928 को बरसाई गयी और 17 नवम्बर 1928 को लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गयी

लाला लाजपत राय ने नारा दिया था – साइमन गो बैक

साइमन कमीशन को सपोर्ट करने वाले नेता – दीनबंधु छोटू राम और मुस्लिम लीग

HSRA – Hindustan Socialist Republic Association
इसके संस्थापक – चन्द्र शेखर आजाद
इन्ही HSRA के सदस्यों के द्वारा साण्डर्स की हत्या करने का प्लान बनाया गया और भगत सिंह ने साण्डर्स की हत्या कर दी

काकोरी कांड में फांसी किसको मिली – रामप्रसाद बिस्मिल (गोरखपुर जेल में) , राजेंद्र लाहिड़ी (गोंडा जेल में), रोशन सिंह (इलाहबाद जेल में), असफाक उल्ला (फैज़ाबाद जेल में)

लाहौर असेम्बली कांड 

इस कांड का प्रमुख कारण

दो बिल पास होने थे – पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के द्वारा असेम्बली में बम फेका गया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए इस नारे को मोहम्मद इक़बाल ने लिखा था

राजदेव , सुखदेव , भगत सिंह , को न्यायधीश GC हिल्टॉन के द्वारा फांसी की सजा सुनाई गयी इन्हे 23 मार्च 1931 को फांसी डे दी गयी लाहौर जेल में

बदरौली सत्याग्रह – 1928 में गुजरात में चला

यह सत्याग्रह आदिवासी महिलाओ द्वारा चलाया गया इस सत्याग्रह का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया

सरदार वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि गाँधी ने दी थी

अगर पेपर में गाँधी का ऑप्शन न हो तो बदरौली की महिलाओ ने दिया यह लगाना है

लाहौर अधिवेशन – 1929 में रावी नदी के किनारे पर हुआ

इसके अध्यक्ष थे जवाहर लाल नेहरू

31 दिसंबर 1929 को झंडा फेहराया गया और नेहरू ने कहा की मै एक समाजवादी और गणतंत्र वादी इंसान हु

26 जनवरी 1930 में यही पर भारत में पूर्ण स्वाधीनता दिवस मनाने की बात कही

सविनय अविज्ञा आंदोलन – 1930

इसका अर्थ था अंग्रेज सरकार द्वारा बनाये गए कानूनों की अवहेलना करना

दांडी यात्रा , जियारलांग आंदोलन , वन सत्याग्रह , कर नहीं देंगे आंदोलन , लाल कुर्ती आंदोलन ये सभी सविनय अविज्ञा आंदोलन के पार्ट्स थे

दांडी यात्रा – 12 मार्च 1930 को गाँधी ने शुरू की और गाँधी जी के साथ 78 लोग शामिल थे इसमें

गाँधी जी 5 अप्रैल 1930 को गुजरात पहुंचे और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ दिया

ये यात्रा करीब 365 किलोमीटर की थी 240 मील

दांडी गुजरात के नवसारी में है।

गाँधी ने 24 दिन में यह यात्रा पूरी की

दक्षिण भारत में नमक कानून चलाने वाले नेता –

तमिलनाडु – राजा गोपालाचार्य
ओडिशा – गोपीचन्द्र
केरल – K केलप्पन

जियारलांग आंदोलन – यह आंदोलन मणिपुर में नागा जनजाति ने चलाया

इसके नेता थे – मंदोनाग

इसकी मृत्यु के बाद इसकी पत्नी गोडिनाल्लू ने चलाया

नेहरू ने गोडिनाल्लू को रानी की उपाधि दी

कर नहीं देंगे आंदोलन – बिहार में चला (भागलपुर और मुंगेर में )

वन सत्याग्रह – लड़को और लड़कियों ने चलाया

लड़को को नाम दिया गया – वानर सेना
लड़कियों को नाम दिया गया – माजरी सेना

चिपको आंदोलन – 1973 में उत्तराखंड में चला सुन्दर पल बहुगुणा ने चलाया

एपीको आंदोलन – 1983 में कर्णाटक में P हेगड़े ने चलाया

लाल कुर्ती आंदोलन – 1930 में अब्दुल गफ्फार खा ने चलाया इसे सीमांत गाँधी के नाम से भी जाना जाता है
इसे भारत रत्न भी मिला है

व्यक्तिगत सत्याग्रह – 17 अक्टूबर 1940 को महात्मा गाँधी ने शुरू किया था

इस सत्याग्रह में गिरफ्तार होने वाले पहले सत्याग्रही विनोबा भावे थे और दूसरे पंडित जवाहर लाल नेहरू थे

Updated: October 28, 2019 — 12:05 pm

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