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Bhartiya Samvidhan in Hindi – भारतीय संविधान

Bhartiya Samvidhan in Hindi – भारतीय संविधान

भारतीय संविधान कब लागु हुआ

 

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और यह दो भागो में डिवाइड किया गया
लिखित संविधान – इसे अमेरिकी या भारतीय संविधान कहा गया
अलिखित संविधान – इसे ब्रिटिश संविधान कहा गया

भारत का संविधान विश्व का सबसे लम्बा लिखित संविधान है
विश्व का पहला लिखित संविधान – अमेरिका का है

संविधान को दो भागो में बांटा गया –
मूल संविधान – जिसमे 395 अनुच्छेद और 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ है
आज का संविधान – 465 अनुच्छेद और 25 भाग और 12 अनुसूचियाँ है

भारत का संविधान किसने लिखा

भीमराव अम्बेडकर

भारतीय संविधान के भाग

 

भाग 1 – संघ और उसके राज्य क्षेत्र

भाग 2 – नागरिकता

भाग 3 – मौलिक अधिकार

भाग 4 – राज्य के निति निर्देशक तत्व

भाग 4 A – मूल कर्तव्य

भाग 5 – संघीय कार्यपालिका

भाग 6 – राज्य कार्यपालिका

भाग 9 A – पंचायत

भाग 9 B – नगरपालिका

भाग 11 – केंद्र राज्य सम्बन्ध

भाग 12 – वित्त से सम्बंधित

भाग 14 – केंद्र और राज्य सेवाए

भाग 15 – चुनाव आयोग और निर्वाचन आयोग

भाग 18 – आपातकालीन उपबंध

भाग 20 –  सविधान संसोधन से सम्बंधित

भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ

अनुसूची 1 – संघ और उसका राज्य क्षेत्र

अनुसूची 2 – सवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के वेतन

अनुसूची 3 – विभिन्न उम्मीदवारों की सपथ से सम्बंधित

अनुसूची 4 – राज्य और केंद्र शासित प्रदेशो में राज्यसभा की सीटों का बटवारा

अनुसूची 5 – अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्रों में प्रशासन

अनुसूची 6 – असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में अनुसूचित जाति और जनजाति का प्रशासन

अनुसूची 7 – शक्तियों का विभाजन

इसमें तीन सूची शामिल है – संघ सूची , राज्य सूची , समवर्ती सूची
संघ सूची – यूनियन लिस्ट (100 विषय)
राज्य सूची – स्टेट लिस्ट (61 विषय)
समवर्ती सूची – कंकररेंट लिस्ट (52 विषय)

अनुसूची 8 – 22 भाषाएँ जिनको राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है । मूल रूप में केवल 14 भाषाएँ है

अनुसूची 9 – 1st amendment 1951 के तहत शामिल की गयी सूची नंबर 9 – संविधान संसोधन

अनुसूची 10 – दाल बदल से सम्बंधित है इस सूची को 52 amendment 1985 में शामिल किया गया है

अनुसूची 11 – 73rd सवैधानिक संशोधन 1992 में इसे शामिल किया गया इसमें पंचायती राज शामिल है

अनुसूची 12 – 74th सवैधानिक संशोधन 1992 में इसे शामिल किया गया इसमें नगरपालिका और नगर निगम शामिल है

भारत के संविधान के विभिन्न अंग जहा जहा से लिए गए है

ब्रिटेन से – संसदीय प्रणाली , विधि का शासन , राष्ट्रपति का सवैधानिक स्वरुप

अमेरिका से – मौलिक अधिकार , संविधान की सर्वोचता , राष्ट्रपति पर महाभियोग , उपराष्ट्रपति का पद , जुडिशल रिव्यु , न्यायिक पुनर्विलोकन (सुप्रीम कोर्ट को इस पर अधिकार)

कनाडा से – एक सशक्त केंद्र के साथ अर्धसंघ सरकार का स्वरुप , राज्यपाल की नियुक्ति
भारत को अर्धसंघ बोला – KC व्येह्ऱ ने

आयरलैंड से – राज्य के निति निर्देशक तत्व , राज्यसभा से 12 सदस्यों को मनोनीत करना राष्ट्रपति के द्वारा, कला , साहित्य , सेवा , विज्ञानं, क्षेत्रों में अच्छा काम करने वाले को मनोनीत करना

ऑस्ट्रेलिया से – समवर्ती सूची , लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक का प्रावधान

साउथ अफ्रीका से – सविधान संशोधन की क्रिया

रूस से – मूल कर्तव्य और सामाजिक और राजनैतिक और आर्थिक स्वतंत्रता (ये सभी 1917 की रुसी क्रांति से लिए गए थे)

फ्रांस से – गणतांत्रिक प्रणाली , जिसमे राज्य का प्रमुख , वहा की जनता द्वारा प्रतयक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाये , स्वतंत्रता और समानता की अवधारणा ( ये सब फ़्रांसिसी क्रांति से लिए गए है)

जापान से – विधि द्वारा स्थापित क्रिया

जर्मनी से – आपातकाल के समय में मूल अधिकारों का निलंबन

भारतीय संविधान की प्रस्तावना

इसे संविधान का सार भी कहते है

इसमें बताया गया है की संविधान का उद्देश्य क्या है और स्वरुप क्या है

संविधान का स्त्रोत क्या है

प्रस्तावना की भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से ली गयी है और प्रस्तावना अमेरिका के संविधान से ली गयी है

प्रस्तावना का उद्देश्य इसका अआधार बनेगा

हम भारत के लोग, भारत को एक स्वतंत्र प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए और इसके सभी नागरिको को सामाजिक , आर्थिक, और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना की स्वतंत्रता, अवसर और प्रतिष्ठा, प्रदान करने के लिए और उन सब में व्यक्ति की गरिमा , राष्ट्र की एकता, और अखंडता को प्रदान करने वाली, बंधुत्व को बढ़ाने वाली, द्रढ़ संकल्प होकर आज इस संविधान सभा में 26 नवम्बर 1949 को संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित , आतमसमर्पित करते है

प्रस्तावना के कुछ भाग

संविधान का स्त्रोत – हम भारत के लोगो ने

राज्य का स्वरुप – प्रभुत्व संपन्न , समाजवादी, निरपेक्ष , लोकतान्त्रिक, गणतांत्रिक

उद्देश्य – आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक न्याय

अवसर और प्रतिष्ठा को समानता

बंधुत्व की भावना

राष्ट्र की एकता और अखंडता

प्रभुत्व संपन्न राज्य – आंतरिक और बाहरी मामलो में निर्णय लेने में स्वतंत्र

समाजवादी – समानता को प्रमुखता दी जाये यानि के अमीर और गरीब के बीच के अंतर को काम किया जाये

पंथनिरपेक्ष – राज्य का कोई धर्म नहीं होता उसकी दृष्टि में सब सामान होते है

लोकतान्त्रिक – लोगो में शक्ति निहित हो यानि की शासन को जनता चलाएगी ये दो भागो में विभाजित किया गया –

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष

प्रत्यक्ष – स्विट्ज़रलैंड से लिया गया जिसमे लोगो का शासन और जनमत संग्रह का अधिकार शामिल है

अप्रत्यक्ष – लोगो के द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के द्वारा शासन चलाया जाएगा

गणतांत्रिक देश – किसी भी राज्य का प्रमुख जनता द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाये

बेरुबारी केस – 1960 में चला

ये प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं मानते थे , संविधान संशोधन नहीं होगा

केशवाबन्द भर्ती केश 1973 – प्रस्तावना संविधान का प्रमुख अंग है ये मानते थे संविधान संशोधन किया जा सके

42th संविधान संशोधन 1976 में तीन शब्द शामिल किये गए – समाजवाद, पंथनिरपेक्ष, अखंडता

भारत के संविधान के विभिन्न भागो का विस्तृत वर्णन

भाग 1 – संघ और उसका राज्य क्षेत्र इसमें आर्टिकल (1 – 4 ) आते है

Article 1 – भारत राज्यों का संघ होगा

इसमें राज्य क्षेत्र और संघ राज्य क्षेत्र शामिल होंगे

अर्जित किये गए क्षेत्र शामिल होंगे

संघ हमे शासन प्रणाली के बारे में बताता है

विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ होगा

Article 2 – नए राज्यों का गठन और संघ में प्रवेश

इसका उदाहरण – सिक्किम को 36 वे संविधान संशोधन के तहत 1975 में भारत में शामिल किया गया संसद के द्वारा

Article 3 – संसद नए राज्यों का निर्माण करेगा और इनके नाम में परिवर्तन भी कर सकता है

संसद राज्यों की सीमा में भी परिवर्तन कर सकता है यानि किसी भी राज्य के क्षेत्र को घटा या बढ़ा सकती है संसद लेकिन राज्यों से सम्बंधित

प्रस्ताव केवल रास्ट्रपति की पूर्वानुमति के साथ पेश किये जाएंगे

राष्ट्रपति उन राज्यों के विधानमंडल से राय ले सकता है लेकिन वो राय मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं है

Article 4 – Article 2 और Article 3 के तहत किये गए संशोधन Article 368 के तहत माने नहीं जाएंगे

Article 368 में विशेष बहुमत से संशोधन किया जा सकता है

1948 में धर आयोग की स्थापना की जाती है इसको ही भाषीय प्रान्त आयोग कहते है

इस आयोग ने रिपोर्ट में कहा की भाषा के आधार पर राज्यों का गठन नई बल्कि प्रशासनिक आधार पर राज्यों का गठन किया जाये

इसके बाद 1948 में JVP समिति बनी इसमें जो शामिल थे उनके नाम है – जवाहर लाल नेहरू , वल्लभ भाई पटेल, पताभिसितारमैया । इन तीनो ने भी वही रिपोर्ट दी की भाषा के आधार पर नए राज्यों का गठन नई किया जाना चाहिए

पहला भाषा के आधार पर किस राज्य का गठन हुआ – आंध्रप्रदेश

1953 में श्रीरामलु 56 दिन की हड़ताल पर बैठेंगे और इनकी मृत्यु हो जाती है तो इसके बाद ही आंध्रप्रदेश का गठन किया गया

1953 में फज़ल अली आयोग का गठन हुआ जिसके अध्यक्ष फज़ल अली थे

1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लाया गया उस समय 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश थे

1960 में बॉम्बे दो भागो में बटा गुजरात और महाराष्ट्र

तेलंगाना 29 वा राज्य बना 2014 में

भाग 3इसमें (Article 12 – 35 ) आते है

मौलिक अधिकार और मानवाधिकार आते है

मौलिक अधिकार – किसी राज्य के या देश के द्वारा अपने नागरिको को दिए जाने वाले अधिकार (मौलिक अधिकार ) कहलाते है

संविधान के भाग 3 को मैग्नाकार्टा भी बोला जाता है

किसी भी व्यक्ति के सामाजिक आर्थिक और नैतिक विकास के लिए जरुरी है ये राज्य के विरुद्ध प्राप्त है यानि राज्य पर कुछ हद तक प्रतिबन्ध लगाते है

यह न्यायालय द्वारा न्यायचित है मतलब परिवर्तनीय है

मौलिक अधिकार – ये अमेरिका के संविधान से लिए गए है , मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे

अब 6 अधिकार है , सम्पति के अधिकार को 1978 में 44 वे संविधान संशोधन के द्वारा मूल अधिकार से बहार निकल कर Article 300 A के तहत इसे विधिक अधिकार बना दिया गया सम्पति का अधिकार Article 31 में आता है

6 मौलिक अधिकार –

समानता का अधिकार – (Article 14 – Article 18 )
स्वतंत्रता का अधिकार – (Article 19 – Article 22 )
शोषण के विरुद्ध अधिकार – (Article 23 – Article 24)

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार – (Article 25 – Article 28)
शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार – (Article 29 – Article 30)
सवैधानिक उपचारो का अधिकार – (Article 32)

Article 12 

राज्य की परिभाषा दी गयी के इसमें कौन कौन शामिल है

संसद और संघीय कार्यपालिका

विधान मंडल और राज्य कार्यपालिका

स्थानीय स्वशासन संस्थाए (पंचायत, ब्लॉक समिति , जिला परिषद्, नगरपालिका )

LIC , ONGC , Gail

भारत के अधीन सेवक

Article 13  

संसद किसी भी ऐसी विधि का निर्माण नहीं करेगी जिसमे मौलिक अधिकारों का उलंघन होता हो

उच्तम न्यायलय को न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार

Article 14

विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण

विधि के समक्ष समता – United Kingdom से ली गयी इसका मतलब विधि की नजर में सब समान है

विधियों का समान संरक्षण – समान के साथ समान व्यव्हार

इसका अपवाद भी है – राष्ट्रपति , राज्यपाल , MLA , राजदूत को विशेष अधिकार प्राप्त है

Article – 15

राज्य किसी नागरिक के साथ , जन्मस्थान , लिंग , जाति, धर्म, के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा

दुकानों , सार्वजानिक स्थानों पर प्रवेश से रोका नहीं जाएगा

इसका अपवाद – Women /SC /ST / OBC के लिए राज्य अलग से प्रावधान कर सकता है

Article 16

अवसर और नियोजन की समता (सरकारी सेवाओं में)

इसका अपवाद – Women /SC /ST / OBC के लिए आरक्षण की सुविधा दे सकता है

OBC – 27 %
SC – 14 %
ST – 7 %

Article 17

अस्पृशतया का अंत

जातिसूचक शब्द बोल देना और किसी के साथ गाली गलोच करना

Article – 18

उपाधियों का अंत (शेक्षणिक और सैन्य उपाधियों को छोड़कर)

Article 19

स्वतंत्रता का अधिकार –

वाक और अभिव्यक्ति का अधिकार

सभा करने का अधिकार

संघ और संगठन बनाने का अधिकार लेकिन संगठन anti – nation नहीं होना चाहिए

भारत में बिना बाधा के घूमने का अधिकार

भारत में कही भी बसने का अधिकार

अपवाद – जम्मू में स्थायी निवास नहीं कर सकते केवल जम्मू और कश्मीर के लोग ही रह सकते है

व्यापार करने का अधिकार बिना रोक टोक के

अपवाद – Atomic energy , Railway , खनिज संशाधन , नशीले पदार्थ का व्यापार नहीं कर सकते

प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार

RTI का अधिकार

Article – 20

अपराधों की दोषसिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण का अधिकार (अपराध तभी माना जाएगा जब उस समय व्यक्ति ने किसी कानून का उलंघन किया हो)

एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दंड नहीं दिया जाएगा

स्वयं के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जायगा

Article 21

प्राण और दैहिक स्वतंत्रता

किसी भी व्यक्ति को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता से वंचित केवल राज्य द्वारा बनाये गए कानून से किया जा सकता है

जीने का अधिकार

विदेश आने जाने का अधिकार

निजता का अधिकार

अपनी मनपसंद से शादी करने का अधिकार

Article 21 A

6 से 14 वर्ष के बच्चो को निशुल्क शिक्षा का अधिकार (ये 86 वे संविधान संशोधन के तहत 2012 में )

Article 22

गिरफ़्तारी और निवारक निरोध से संरक्षण (यानि संदेह के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता)

गिरफ्तारी का कारण पूछने का अधिकार

24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार

अपनी मनपसंद वकील करने का अधिकार

Article 23

शोषण के विरुद्ध अधिकार

बलात, श्रम, मानव दुर्व्यापार प्रतिबन्ध (जबरदश्ती कार्य करवाना)

अपवाद – राज्य इच्छा के विरुद्ध कार्य करवा सकता है

Article 24

14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो से कार्य नहीं करवाया जाये

18 वर्ष से कम वर्ष के बच्चो को खतरनाक जगहों पर कार्य न करवाया जाये

Article 25

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

किसी भी धर्म को अपनाने का अधिकार और पूजा करने का अधिकार

Article 26

धार्मिक कार्यो का प्रबंधन करने का अधिकार

Article 27

राज्य कोई भी ऐसा टैक्स नहीं लगाएगा जिसका प्रयोग किसी विशेष धर्म के उत्थान के लिए किया जाये

Article 28

राज्य द्वारा पोषित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा निषेध

Article 29
अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति , भाषा, और लिपि का प्रचार करने का अधिकार

Article 30
अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति , धर्म, भाषा , आदि के संरक्षण के लिए शैक्षणिक संसथान खोलने का अधिकार

Article 32

सवैंधानिक उपचारो का अधिकार

यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उलंघन होता है तो वह उच्तम न्यायालय और उच्च न्यायलय जा सकता है

उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय अब इस व्यक्ति को अधिकार दिलाने के लिए पांच तरह के RITS जारी कर सकता है

RITS का मतलब आदेश होता है

Article 32 को संविधान की आत्मा भी कहते है

5 तरह के RITS

बंदी प्रत्यक्षीकरण – ये दो लोगो को जारी की जाएगी

लोक सेवा अधिकारी और निजी व्यक्ति को भी

सशरीर प्राप्त करना – बंदी बनाये गए व्यक्ति को न्यायालय में सशरीर पेश करना

परमादेश – हम आदेश देते है की आप अपने कर्तव्य का पालन करो ये RITS लोक सेवको को जारी की जाती है

अधिकार-परेच्छा – इसमें बताया जाता है की आपको क्या अधिकार है

ये दो लोगो को जारी की जाएगी

लोक सेवा अधिकारी और निजी व्यक्ति को भी

प्रतिषेध और उत्प्रेषण RITS जारी की जाती है उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने अधीनस्थ न्यायालयों को

प्रतिषेध तब जारी की जाती है जब न्यायालय में कोई केस चल रहा हो उसको रोकने के लिए

उत्प्रेषण तब जारी की जाती है जब अंतिम निर्णय आ चूका हो और उस फैसले पर रोक लगानी हो

RITS जारी करने की शक्तिया High Court के पास ज्यादा है सुप्रीम कोर्ट से

Article 33

गुप्तचर एजेंसियो , सैन्य बलो के अधिकारों का संरक्षण के लिए

Article 34

मार्शल लॉ से रिलेटेड है

किसी क्षेत्र में सैन्य शासन लगने पर वहा के नागरिको के अधिकारों का निलंबन किया जा सकता है

आपातकाल के दौरान अधिकारों का निलंबन होता है लेकिन (Article 20 और 21 पर नहीं लगाया जा सकता)

कुछ अन्य जानकारी –

जो अधिकार केवल भारतीय को प्राप्त है
Article 15 , Article 16 ,Article 19 , Article 29 , Article 30

भाग 4 ( इसमें Article 35 – Article 51 ) आते है

Article 35

राज्य के निति निर्देशक तत्व

ये आयरलैंड के संविधान से लिए गए है

ये न्यायालय द्वारा परिवर्तनीय नहीं है यानि के इनको बदला नहीं जा सकता

राज्यों को नीतिया बनाते समय निर्देश देते है

शासन के मुलभुत नियम

Article 36

इसमें राज्य की परिभाषा व्याप्त है

Article 37

राज्य के निति निर्देशक तत्व जो न्यायालय द्वारा परिवर्तनीय नहीं ये शासन के मुलभुत नियम होते है

Article 38

लोगो को सामाजिक , आर्थिक , राजनैतिक न्याय प्रदान करने की अवधारणा रखते है

Article 39

सार्वजानिक संस्थानों का प्रयोग , सार्वजनिक हित में हो

समान कार्य के लिए समान वेतन , यानी पुरुष और महिलाओ के लिए समान वेतन

बच्चो के बचपन और मजदूरों का शोषण से संरक्षण

आर्थिक संस्थानों को केन्द्रीयकरण न हो

Article 39 a

गरीबो को निशुल्क और अनिवार्य विधिक सहायता प्रदान की जाये ये 42nd संविधान संशोधन में जोड़ा गया 1979 में

Article 40

राज्य , पंचायती राज का गठन करेगा और उनको मजबूत बनाएगा

Article 41

कुछ दशाओ में राज्य लोगो की आर्थिक सहायता करेगा जैसे बेरोजगारी भत्ता और पेंशन

Article 42

कार्य करने की उपयुक्त मानवीय दशाओ का होना , महिलाओ के लिए प्रसूति अवकाश उपलब्ध करना (26 हफ्ते की)

Article 43

मजदूरों को उपयुक्त मजदूरी उपलब्ध करना और उनको संघ बनाने का अधिकार दिया जाये

Article 44

समान नागरिक संहिता – गोवा में लागु है ये

Article 45

0 – 6 वर्ष के बच्चो के लिए निशुल्क शिक्षा और अनिवार्य शिक्षा

Article 46

SC / ST और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए शैक्षणिक और आर्थिक हितो की रक्षा करेगा राज्य

Article 47

राज्य का कर्तव्य है की वह नागरिको के स्वास्थ्य की देखभाल करेगा राजा नशीले पदार्थो पर प्रतिबंध लगाएगा

Article 48

राज्य का कर्तव्य है की वह कृषि और पशुपालन में आवश्यक तकनीक अपनाकर सुधार करेगा

Article 48 a

पर्यावरण , वन, और वन्य जीवो का संरक्षण

Article 49

राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सुरक्षा

Article 51

राज्य का दायित्व है की अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति को बढ़ावा देगा

भाग 4 a

मौलिक कर्तव्य – ये रूस से लिए गए है और ये स्वर्ण सिंह की सिफारिश पर 42 वे सविधान संशोधन के तहत शामिल किये गए इसे मिनी संविधान भी कहते है

जब मौलिक कर्तव्य लागु किये गए तो दस थे अब 11 है

11 वा मौलिक कर्तव्य 86 वे संविधान संशोधन के तहत 2002 में शामिल किया जाएगा

6 से 14 वर्षो के बच्चो के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा

संविधान का पालन और भारत के राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का पालन करना

राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने के लिए तत्वों और आदर्शो को बनाये रखना

भारत की प्रभुता और अखंडता की रक्षा करना

देश की सुरक्षा करना

जाति, धर्म, भाषा के आधार पर भेदभाव न करना

अपनी भाषा , लिपि संस्कृती, की रक्षा करना

पर्यावरण, वन, झीलों नदियों का संरक्षण करना

वैज्ञानिक दृश्टिकोण में उपयुक्त सुधार

व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासो से देश के गौरव को बढ़ाने का प्रयास करना

राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण

6 से 14 वर्ष के बच्चो को निशुल्क शिक्षा

ये सभी Article 51 a के तहत आते है

भाग 5

इसमें संघ की कार्यपालिका आती है

जिसमे राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , महान्यायवादी

राष्ट्रपति – कार्यपालिका का प्रमुख होता है और इसे ही भारत का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है।

Article 52 

इसमें कहा गया है की भारत का एक राष्ट्रपति होगा

Article 53

कार्यपालिका की समस्त शक्तिया राष्ट्रपति में निहित होंगी वह उन शक्तियों का प्रयोग स्वयं कर सकता है या अन्य की मदद से कर सकता है

Article 54

इसमें कहा गया है की कौन कौन चुनाव में भाग लेगा

इसमें राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल आता है जिसमे लोकसभा के निर्वाचित सदस्य होते है

निर्वाचित सदस्य – चुनाव प्रणाली से चुने गए

मनोनीत सदस्य – लोकसभा के 12 सदस्य और 2 एंग्लो इंडियन

राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य भी आते है इसमें

राज्य की विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्य

दिल्ली और पांडिचेरी विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्य भी आते है

Article 55

राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रणाली

एकल सक्रमणीय आनुपालिक गुप्त मतदान प्रणाली

आवश्यक कोटा – राष्ट्रपति बनने के लिए कुल मत से एक ज्यादा लेना पड़ेगा यानी की 51 %

Article 56

राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का बताया गया है (राष्ट्रपति की कुछ शक्तिया भी होती है)

राष्ट्रपति समय से पहले उपराष्ट्रपति को इस्तीफा दे सकता है या मुख्य न्यायधीश को

राष्ट्रपति पर महाभियोग चला कर समय से पहले ही हटाया जा सकता है

Article 57

भारत का राष्ट्रपति एक से अधिक बार निर्वाचित हो सकता है लेकिन अमेरिका का राष्ट्रपति केवल दो बार निर्वाचित हो सकता है उसका कार्यकाल चार साल का होता है

Article 58

राष्ट्रपति चुनने के लिए योग्यताएं

वह भारत का नागरिक हो

उसकी उम्र 35 वर्ष हो लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो

लाभ के पद पर न हो

कम से कम 50 प्रस्तावक और 50 समर्थक होना चाहिए

प्रस्तावक – जो यह बोले की ये व्यक्ति चुनाव लड़ने में सक्षम है

15 हजार की जमानत राशि RBI में जमा करानी पड़ती है

टोटल वोट का 1 /6 भाग प्राप्त नहीं होता है तो जमानत राशि जब्त हो जाती है

Article 60

राष्ट्रपति की शपथ

उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलवाता है

Article 61

राष्ट्रपति पर महाभियोग – राष्ट्रपति को हटाना

जब राष्ट्रपति अपने पद पर रहते हुए संविधान का उलंघन करता है तो लोकसभा के 1 /4 सदस्यों को 14 दिन पूर्व राष्ट्रपति को नोटिस भेजना पड़ेगा किसी भी सदन में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है लोकसभा को 2 /3 बहुमत से प्रस्ताव पास करवाना पड़ेगा राज्यपाल इसकी जाँच करवाएगा और इसके बाद ही 2 /3 बहुमत के साथ महाभियोग प्रस्ताव को पास करेगा जिस दिन ये प्रस्ताव दोनों सदनों में पास होगा तो उसी दिन राष्ट्रपति को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा राष्ट्रपति के महाभियोग प्रक्रिया में भाग लेने वाले सदस्य –

लोकसभा के मनोनीत सदस्य और निर्वाचित सदस्य
राज्यसभा के मनोनीत सदस्य और निर्वाचित सदस्य

Updated: October 30, 2019 — 2:16 pm

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